सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों का मिड-टर्म एग्ज़ाम, Midterm Exam of Ruling Party and Opposition

January 20, 2022 Chander Mohan 0

पाँच प्रदेशों की 690 सीटों पर चुनाव देश की भावी राजनीतिक दिशा तय करेंगे। सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम भाजपा, नरेन्द्र मोदी, योगी आदित्यनाथ के लिए बहुत महत्व रखतें हैं।  साथ ही यह भटक रही कांग्रेस पार्टी और उसके हाईकमान तथा प्रादेशिक शक्तियों की भी भावी दिशा तय करेंगे। अगर भाजपा आसानी से जीत जाती है तो योगी आदित्यनाथ इतिहास बनाऐगे क्योंकि गोबिन्द बल्लभ पंत के बाद एक अवधि पूरा करने के बाद किसी मुख्यमंत्री को दूसरी बार वहां चुना जाएगा।  इसी के साथ मोदी के बाद की भाजपा में वह ताकतवार उत्तराधिकारी बन उभरेंगे और भाजपा देश भर में अपना ऐजेडा जोरशोर से लागू करने में सफल रहेगी। विपक्ष और निरुत्साहित होगा और आपसी टकराव बढ़ेगा। […]

‘शो’ जारी रहना चाहिए, The Show Must Go On

January 13, 2022 Chander Mohan 0

कोविड काल में जब देश में ऑमिक्रॉन का विस्फोट हो रहा है चुनाव आयोग ने पाँच विधानसभाएँ के चुनाव की घोषणा की है। जायज़ चिन्ता है कि क्या इससे संक्रमण  का विस्फोट तो नही होगा? उत्तर प्रदेश और पंजाब उन प्रदेशों में से है जहाँ कम टीका लगा है।  मुख्य चुनाव आयुक्त का कहना है कि अधिक केस महाराष्ट्र और दिल्ली में हैं जहाँ चुनाव नही हो रहे। यह तर्क सही नही क्योंकि कोई यक़ीन से नही कह सकता कि जब तक चुनाव होंगे उत्तर प्रदेश और पंजाब की वह हालत नही होगी जो आज मुम्बई या दिल्ली की है। पन्द्रह जनवरी तक रैलियाँ बंद रखी गईं है पर उसके बाद क्या कोरोना खत्म हो जाएगा?  इसके बावजूद मैं चुनाव […]

पंजाब में हिन्दू सीएम क्यों नही हो सकता?, Why Can’t A Hindu Be CM of Punjab

January 6, 2022 Chander Mohan 0

मैं साम्प्रदायिक सवाल खड़ा नही कर रहा। यह राजनीतिक, समाजिक और व्यवहारिक सवाल है कि पंजाब में कोई हिन्दू मुख्यमंत्री क्यों नही हो सकता? यहाँ अंतिम हिन्दू जो मुख्यमंत्री रहे वह कामरेड रामकृष्ण थे जिन्होंने जुलाई 1966 में इस्तीफ़ा दे दिया था। अर्थात पाँच दशक से अधिक समय से यहां कोई हिन्दू सीएम नही बन सका जबकि पंजाब में हिन्दुओं की जनसंख्या संतोषजनक 38.49 प्रतिशत है। आगे लिखने से पहले बता दूँ कि मुझे तनिक भी आपति नही अगर कोई सिख या दलित या कोई और सीएम बन जाए पर किसी हिन्दू के बनने पर एतराज़ क्यों हो? अच्छी बात है कि पहली बार एक दलित चरणजीत सिंह चन्नी सीएम बने है और सभी रिपोर्ट  कह रहीं है कि वह […]

वह साल जो हमें ज़ख़्मी छोड़ गया, The Year That Left Us Wounded

December 30, 2021 Chander Mohan 0

उन तस्वीरों को भूलना मुश्किल है। यह वह तस्वीरें हैं जो देश की आत्मा को झुलसाने वाली थीं। कहीं चिताएँ जल रहीं थी तो कहीं अस्पतालों के आगे एमबूलैंस की क़तार खड़ी थी तो कहीं कोरोना के मरीज़ों के घरवाले डाक्टरों से गिड़गिड़ा रहे थे कि मरीज को दाख़िल कर लें। एक एक आक्सिजन के सिलैंडर के लिए लोग तड़प रहे थे। शमशानों के आगे लाईने लगी थी। एक दम लॉकडाउन के कारण कई कई दिन पैदल गाँव के लिए चलते बेरोज़गार हुए  प्रवासियों के चित्र भी देखे। बेबसी और आशाहीनता की स्थिति थी।    पराकाष्ठा तो तब हुई जब गंगा में शव बहते नजर आए। कम से कम मैंने अपनी ज़िन्दगी में ऐसे दृश्य कभी नही देखे।  कुछ दिनों मे […]

1971 की विजय और इंदिरा गांधी, 1971 and Indira Gandhi

December 23, 2021 Chander Mohan 0

इस महीने हम स्वर्णिम विजय दिवस मना रहें हैं जब 16 दिसम्बर 1971 को उस वक़्त के पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तान की सेना ने समर्पण कर दिया था और एक आजाद बांग्लादेश का उदय हुआ था। डा.कर्ण सिंह जो तब मंत्रिमंडल के सदस्य थे बताते हैं कि ‘प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी एक प्रकार से भागती सदन में पहुँची थी…उनके पहुँचते ही सदन ख़ामोश पड़ गया। वह अपनी सीट पर खड़ी हो कर बोली, मिस्टर स्पीकर, ढाका ने भारतीय सेना और मुक्ति बाहनी के आगे समर्पण कर दिया है। सदन जश्न में फूट पड़ा’। जश्न तो बनता ही था। एक झटके में भारत ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए और दो राष्ट्र की अवधारणा को समाप्त कर दिया और इसके साथ […]

भारत-रूस, ढीली दोस्ती, India -Russia Weak Friendship

December 16, 2021 Chander Mohan 0

     एक समय था जब सोवियत यूनियन के नेता निकिता क्रुश्चेव ने भारत से कहा था ‘आप हिमालय से हमें आवाज़ लगाओ हम दौड़े चले आऐंगे’। इससे पहले सितम्बर 1959 में बीजिंग में एक तल्ख़ मुलाक़ात के दौरान क्रुश्चेव ने माओ जीडोंग पर आरोप लगाया था कि भारत के साथ झड़प और तिब्बत की स्थिति जिसके कारण दलाई लामा को तिब्बत छोड़ना पड़ा, के लिए पूरे तौर पर चीन ज़िम्मेवार है। क्रुश्चेव इतने नाराज़ हो गए कि अपनी सरकारी यात्रा बीच छोड़ बीजिंग से  लौट आए।  1962 के युद्ध के दौरान सोवियत यूनियन का झुकाव हमारी तरफ था। तब से लेकर अब तक स्थिति बहुत बदल चुकी है। शीतयुदध में पश्चिम के हाथो पराजित होने का बाद सोवियत यूनियन ही […]