विभाजन और भव्य त्रिमूर्ति (Partition: The Grand Triumvirate)

November 15, 2018 Chander Mohan 0

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वह लोग जो जवाहर लाल नेहरू को आजादी के बाद प्रधानमंत्री बनाए जाने की आलोचना करते हैं यह भूलते हैं कि यह फैसला महात्मा गांधी का था जिसे सरदार पटेल ने सहर्ष स्वीकार किया था। गांधी जी ने जवाहर लाल नेहरू के बारे लिखा था, “यह मेरी भाषा बोलेगा।” गांधी जी की इस इच्छा को पटेल ने खुशी से स्वीकार कर लिया था और उन्होंने नेहरू को कहा था, “उस लक्ष्य के लिए जिसके लिए भारत में किसी ने उतनी कुर्बानी नहीं दी जितनी आपने दी है मेरी बेहिचिक वफादारी और निष्ठा आपके साथ है। हमारी जोड़ी बेजोड़ है।“ जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं उन्हें पटेल के इन शब्दों का ध्यान रखना चाहिए जिनमें […]

क्योंकि तब सरदार पटेल थे (Because Sardar Patel was There)

November 8, 2018 Chander Mohan 0

सरदार वल्लभभाई पटेल के बारे मई 1933 में महात्मा गांधी लिखते हैं,“क्या मुझे इस बात का अहसास नहीं कि भगवान की मुझ पर कितनी अनुकंपा रही है कि मुझे वल्लभभाई जैसे असाधारण व्यक्ति का साथ मिला है। ” उन्होंने पटेल से यह भी कहा था, “तुम्हारा दिल शेर जैसा हैं”। लेकिन सरदार पटेल के योगदान के बारे सटीक टिप्पणी राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने मई 1959 में की थी कि, “आज एक भारत है जिसके बारे हम सोच सकते हैं और बात कर सकते हैं तो यह बहुत कुछ सरदार पटेल की शासन कला तथा मजबूत प्रशासन का परिणाम है।“ भारत की प्राचीन सभ्यता है लेकिन हम सदा बिखरे रहें हैं। यही कारण है कि 1947 से लगभग एक हजार […]

संघ: निरंतरता और परिवर्तन ( RSS: Continuity and Change)

November 1, 2018 Chander Mohan 0

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की तीन दिन की व्याख्यान श्रृंखला के प्रति देश में असामान्य दिलचस्पी है। इससे पहले वह पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को मुख्य अतिथि के तौर पर बुला चुके हैं। क्या बदलते समय को देखते हुए संघ भी बदल रहा है? आखिर आज की जीन्स डाले और हाथ में मोबाईल पकडऩे वाली पीढ़ी की जरूरत को देखते हुए संघ ने निक्कर की जगह पैंट शुरू कर ही दी है। पर क्या अब वैचारिक बदलाव के भी संकेत मिल रहें है? क्या आज के भारत की जरूरत को देखते हुए संघ अधिक उदार तथा दूसरों को साथ लेकर चलने वाली संस्था बन रही है? राम माधव का मानना है कि वास्तव में संघ बदल […]

यह हादसों का देश है (The Tragedy in Amritsar)

October 25, 2018 Chander Mohan 0

एक बार फिर यह साबित हो गया है कि यह हादसों का देश है। यहां इंसानी जिंदगी की कोई कीमत नहीं यहां तक कि इंसानों को भी अपनी जिंदगी की कीमत नहीं। नहीं तो कोई कारण नहीं कि अमृतसर में इतनी बड़ी संख्या में लोग पटरी पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे यह जानते हुए कि यह व्यस्त रेल-पथ है। अब सरकार ने मैजिस्ट्रेट की जांच का आदेश दिया है पर घोर लापरवाही के कारण जो 61 जिंदगियां लील गई उनकी जिम्मेवारी किस पर है? एक कुछ महीने की बच्ची है जो बच गई पर उसके मां-बाप मारे गए। उसका और कोई नहीं कौन करेगा इसका पालन? देश, विशेष तौर पर पंजाब, गहरे सदमें में है। एक ही […]

तो फिर कयामत होगी! (#MeToo in India!)

October 18, 2018 Chander Mohan 0

लगभग एक दर्जन महिला पत्रकार द्वारा शोषण की शिकायत पर अकबर का कहना है कि यह आरोप झूठे हैं और वह इस पर कानूनी कार्रवाई करेंगे जो उन्होंने शुरू कर भी दी है। एक महिला प्रिया रमानी के खिलाफ 97 वकील खड़े कर दिए हैं। उनका यह भी सवाल है कि चुनाव से पहले यह तूफान को उठा? कोई एजेंडा है क्या? अगर लगभग एक दर्जन महिलाएं अलग-अलग आरोप लगा रही हैं तो इसे ‘एजेंडा’ कैसे कहा जाएगा? आरोप लगाने वालों में ब्रिटेन में काम करने वाली पत्रकार डेविड रुथ भी है। इन आरोपों को चुनाव से जोडऩा तो बेहूदगी है लेकिन इस सारे विवाद के और पहलू भी हैं। पहली बात सरकार की खामोशी है। जिस सरकार ने “बेटी […]

मायावती, मंज़िल और मजबूरी (Mayawati, Ambition and Limitation)

October 11, 2018 Chander Mohan 0

2014 के आम चुनाव में मायावती की बसपा को एक भी सीट नहीं मिली थी। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी बसपा का प्रदर्शन कमज़ोर रहा था तथा पार्टी को मात्र 19 सीटें ही मिली थीं। पिछले वर्षों में बसपा का ग्राफ तेजी से गिरा है। पांच सालों में बसपा ने 2021 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन केवल 32 सीटें ही जीत पाई। आठ राज्यों में वह अपना खाता भी नहीं खोल पाई। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने 503 उम्मीदवार खड़े किए, एक भी जीत नहीं सका। 99 प्रतिशत उम्मीदवार तो जमानत तक नहीं बचा सके। जिन तीन प्रदेशों में चुनाव होने जा रहे हैं उनमें पिछली बार मध्यप्रदेश में बसपा को छ: प्रतिशत, राजस्थान में तीन […]