गोवा थाईलैंड न बन जाए (Hope Goa does not become another Thailand)

March 22, 2016 Chander Mohan 0

यह लेख मैं गोवा में कुछ दिन व्यतीत करने के बाद लिख रहा हूं। गोवा पर किस तरह का दबाव है यह हवाई अड्डे पर ही समझ आ गई थी जब हमारे साथ छोटे बच्चों को देख कर टैक्सी वाले ने चेतावनी दी कि ‘‘बच्चों को संभाल कर रखो।’’ यह चेतावनी अंत तक कानों में गूंजती रही क्योंकि खूबसूरत गोवा के शांत वातावरण, चमकती रेत, उठती लहरों के बीच एक ऐसा भी गोवा खड़ा हो रहा है जो बदसूरत है, बदनाम है तथा जिसे माफिया समझा जाता है। गोवा को 1970-80 के दशक में हिप्पयों ने खोजा था। यहां की हरयाली, ताड़ तथा नारियल के पेड़ तथा लोगों के सरल स्वभाव ने उन्हें वहां आकर्षित किया था। क्योंकि अधिक दखल […]

अंग्रेजी मीडिया और मिस्टर मोदी (English Media and Mr. Modi)

March 15, 2016 Chander Mohan 0

‘…स्पष्ट है कि कन्हैया जन्मजात से ही ऐसी प्रतिभा का स्वामी है जिसकी एक-एक बात को लाखों लोग मंत्रमुग्ध हो मौन और ध्यान से सुनते हैं…बहुत कम लोग इस बात से इन्कार करेंगे कि यह सितारा अवश्य चमकेगा। कुछ लोग तो यहां तक मानने लगे हैं कि वह एक दिन प्रधानमंत्री बनेगा…।’ यह शब्द अंग्रेजी मीडिया के अपने ‘चमकते सितारे’ करण थापर के हैं जो उन्होंने हाल ही में एक लेख में लिखे हैं और वह उस कन्हैया के बारे लिख रहे हैं जो देशद्रोह के मामले में छ: महीने की जमानत पर है, जिसने हाल ही में ‘डंके की चोट’ पर कहा था कि कश्मीर में सुरक्षा के नाम पर सेना महिलाओं से बलात्कार कर रही है, और जिस […]

जेएनयू में ‘संक्रमण’ (Infection in JNU)

March 8, 2016 Chander Mohan 0

जेएनयू की हालत से परेशान दिल्ली हाईकोर्ट की माननीय न्यायाधीश प्रतिभा रानी ने टिप्पणी की है कि ‘जब भी शरीर में संक्रमण फैलता है पहले मुंह के रास्ते दवाई देकर उसे फैलने से रोकने का प्रयास किया जाता है…कई बार सर्जरी करनी पड़ती है लेकिन अगर संक्रमण इतना फैल जाए कि मांस गलने लगे (गैंग्रीन) तो अंग काटना ही एकमात्र इलाज रह जाता है।’ जो लोग कन्हैया की रिहाई को बड़ी जीत समझ रहे हैं उन्हें न्यायाधीश की यह चेतावनी गंभीरता से लेनी चाहिए। वह दूषित अंग को अलग करने की चेतावनी भी दे रहीं हैं। जो लैफटिस्ट तथा कथित बुद्धिजीवी कन्हैया को मिली अंतरिम जमानत पर विजय दिवस मना रहे हैं उन्हें माननीय न्यायाधीश के पूरे फैसले को पढ़ना […]

हरियाणा के गुनाहगार (The Guilty Men of Haryana)

March 1, 2016 Chander Mohan 0

देखे हैं वह मंजर भी तारीख की नजरों ने लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पाई! हरियाणा धीरे-धीरे लड़खड़ाते हुए सामान्यता की तरफ लौट रहा है लेकिन जख्म इतना गहरा लगा है कि भरने में वर्षों लग जाएंगे। 30 लोग मारे गए। अनुमान है कि 20,000 करोड़ रुपए का विशाल नुकसान हुआ है पर इससे भी बड़ा नुकसान और हुआ है। यह नुक्सान हरियाणा की एक प्रगतिशील प्रदेश की छवि को लगा है। आपसी भाईचारे को लगा है। और प्रशासन पर भरोसे को लगा है। अगर रोहतक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को काले झंडे दिखाए गए और पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा पर वहां जूते फेंके गए तो यह अकारण नहीं। जब कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ झज्जर […]

जनरल साहिब, आप अकेले नहीं हैं! (General Sahib, You Are Not Alone)

February 23, 2016 Chander Mohan 0

यह एक अत्यंत भावुक क्षण था। अरनब गोस्वामी की बहस में जब कुछ वार्ताकारों ने सरकार की केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में तिरंगा फहराने की योजना पर सवाल उठाया तो कई सैनिक के अभियानों नायक रिटायर्ड मेजर जनरल गगन बक्शी भावुक हो उठे। आंखें पौंछते हुए जनरल बक्शी ने मीडिया के एक वर्ग तथा कथित बुद्धिजीवियों द्वारा फैलाए जा रहे माहौल पर यह टिप्पणी की ‘‘दुख हो रहा है हम अकेले रह गए। हम फौजी आज अकेले रह गए। रोने के लिए।’’ कितनी तड़प है इन शब्दों में! कितनी हताशा! देश का एक बहादुर यौद्धा परेशान है कि इस देश में एक मुखर राय ऐसी भी है जो उदारवाद के नाम पर उनका समर्थन कर रही है जो देश की बर्बादी की बात […]

असहमति सही, विरोध जायज़, प्रदर्शन अधिकार, पर देश विरोध अस्वीकार्य (Dissent Fine, Opposition Acceptable, Protests Right but Anti National not acceptable)

February 16, 2016 Chander Mohan 1

जिस वक्त सियाचिन के हीरो लांस नायक हनुमनथप्पा की सलामती के लिए देश भर में प्रार्थनाएं हो रही थीं और देश की रक्षा के लिए उसके 9 साथियों की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त किया जा रहा था उसी दिन दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुछ लोग ‘अफजल गुरू जिंदाबाद’ तथा भारत के टुकड़े टुकड़े करने के नारे लगा रहे थे। जेएनयू के छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया को गिरफ्तार कर लिया है पर वामपंथी उसके समर्थन पर उतर आए हैं और कहा जा रहा है कि देश में आपातकाल लगाया जा रहा है। यह बकवास है। अगर वामदल देश से भाप की तरह उड़ रहे हैं तो इसका भी मुख्य कारण है कि वह चरमपंथ को समर्थन […]