सबसे बड़ी चुनौती: विश्वास की बहाली, The Challenge Ahead

June 10, 2021 Chander Mohan 0

मोदी सरकार का आठवाँ वर्ष कोविड द्वारा की गई भयावह तबाही की छाया में शुरू हो रहा है। वायरस धीरे धीरे घट रहा है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार 350000 मौतें हो चुकीं है पर शमशान के रिकार्ड और गंगा मेंबहती लाशेंकुछ और ही आँकड़ा बता रहीं हैं। आगे तीसरी लहर की सम्भावना से घबराहट है।   जिस देश ने पिछले साल नरेन्द्र मोदी के कहने पर थालियाँ बजाईं थीं, दीपक जलाए थे, उस देश का मिज़ाज बहुत बिगड़ा हुआ है। मोदी इसे ‘शताब्दी में एक बार फैलने वाली महामारी’ क़रार  चुकें हैं पर इससे उनके ज़ख़्म तो नही भरते जो अपने प्रियजन खो बैठें हैं। सी-वोटर के सर्वेक्षण के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है, चाहे वह […]

इस घर को आग लग गई घर के चिराग़ से, As Congress in Punjab Fights Itself

June 3, 2021 Chander Mohan 0

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री हैरल्ड विलसन ने एक बार कहा था कि ‘राजनीति में एक सप्ताह बहुत लम्बा समय होता है’। उनका अभिप्राय था कि राजनीति में बहुत जल्द परिस्थिति बदल सकती है। यह बात पंजाब के मुख्यमंत्री अमरेन्द्र सिंह को अच्छी तरह समझ आ रही होगी। कुछ सप्ताह पहले तक किस को पता था कि उनके ख़िलाफ़ इतनी ज़बरदस्त बग़ावत हो जाएगी और उनकी ही कांग्रेस पार्टी के कुछ सांसद, मंत्री और विधायक अपने मुख्यमंत्री का ही विरोध शुरू कर देंगें? प्रकाश सिंह बादल के सेहत, आयु और राजनीतिक धक्कों के कारण पीछे हटने के बाद अमरेन्द्र सिंह पंजाब के सबसे बड़े नेता है। 2017 के चुनाव में उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की थी […]

हिमालय की आवाज़ ख़ामोश हो गई, Himalaya Has Lost Its Voice

May 27, 2021 Chander Mohan 0

हमने गांधीजी को नही देखा। विनोबा भावे को मैंने बचपन में देखा था, पर कुछ याद नही। अक्तूबर 2010 को जालन्धर में सुन्दरलाल बहुगुणाजी से मिलने का मौक़ा मिला तो एकदम यह आभास हुआ  कि मैं एक गांधीवादी महापुरुष के सामने खड़ा हूँ। सरल, सहज, सादे। जाने माने पर्यावरणविद अनिल जोशी का सही कहना है, “बहुगुणाजी के व्यक्तित्व में मैंने गांधीजी के दर्शन कर लिए”। कोविड से उनके निधन से हिमालय की बुलंद आवाज़ ख़ामोश हो गई, पेड़ों का सबसे बड़ा संरक्षक नही रहा।यह भी आभास मिलता है कि आदर्शवादियों का युग ख़त्म हो रहा है। वह शायद अंतिम गांधीवादी थे जिनका विश्वास दृढ़ था, और उस पर अमल करने का साहस था। वह जानते थे कि एक एक पेड़ […]

कोरोना काल में सरकार और विपक्ष , Government and Opposition in Covid Times

May 20, 2021 Chander Mohan 0

आजाद भारत में इस महामारी से पहले बड़ा राष्ट्रीय संकट 1962 की सर्दियों में आया था जब चीन के हाथों हमें मार पड़ी थी। यह शिकस्त हमें बड़े सबक़ सिखा गई पर तब के घटनाक्रम में लोकतन्त्र के लिए भी सबक़ छिपा है। देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने निश्चित किया कि संसद में घटनाक्रम पर पूरी बहस हो। बहस के दौरान वह पूरा समय सदन में मौजूद रहे यह जानते हुए भी कि उनसे कड़वे और असुखद सवाल पूछे जाएँगे। वह महसूस करते थे कि वह देश के नेता हैं इसलिए जो कुछ हुआ सबसे अधिक उनकी जवाबदेही बनती है। विपक्ष ने सरकार और विशेष तौर पर नेहरू पर ज़बरदस्त हमला किया। उन्होने ख़ूब बेइज़्ज़ती सही। अगर […]

इंसानियत अभी ज़िन्दा है, When State Fails Society Rises

May 13, 2021 Chander Mohan 0

चारों तरफ़ बेबसी का माहौल है। भविष्य के प्रति अनिश्चितता है। शिखिर पर सन्नाटा है। पहले जीने के लिए अस्पतालों के आगे क़तार लगती थी, अब मरने के बाद शमशानघाट के आगे क़तार लग रही है। भारी चिन्ता है कि ग्रामीण क्षेत्र, विशेषतौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार, जो पहली लहर में बचे रहे थे वह अब प्रभावित हो रहें हैं। गाँव वाले खाँसी बुखार की बात कर रहें हैं, असलियत क्या है कोई जानता नही क्योंकि अधिकतर गाँवों में अंगरेज़ो के समय की हैल्थ व्यवस्था है। विदेशों से एनआरआई और सरकारें सहायता भेज रहीं हैं लेकिन बाबू मानसिकता यहां भी अड़चन डाल रही है। ग़ुस्से से भरे एक एनआरआई सज्जन ने शिकायत की है कि बाहर से भेजे सिलेंडर […]

हमारे अधूरे लोकतन्त्र की जय ! Our Imperfect -Perfect Democracy

May 6, 2021 Chander Mohan 0

जिस वक़्त टीवी पर पाँच प्रदेशों के चुनाव परिणाम आ रहे थे उसी वक़्त एक चैनल पर यह एस-ओ-एस फ़्लैश हो रहा था कि दिल्ली के बच्चों के एक अस्पताल में आक्सिजन ख़त्म हो रही है। उसके बाद आप के एक नेता ने उन्हे छ: सिलेंडर पहुँचा भी दिए लेकिन ऐसी अपील की नौबत ही क्यों आए? उससे एक दिन पहले दिल्ली के ही बतरा  अस्पताल में आक्सिजन की कमी से 12 मरीज़ मारे जा चुके थे। यह स्थिति तब है जब दिल्ली हाईकोर्ट लगातार केन्द्र और सरकार को फटकार लगाताआर हा है। हाईकोर्ट का यहां तक कहना था कि राज्य नागरिकों के बुनियादी जीवन के अधिकारकी रक्षा करने में असफल रहा है। यह बहुत बड़ा अभियोग है लेकिन सच्चाई […]