• Author at Kremlin in Moscow

यात्रा का अंत? ( End of Yatra ? )

April 26, 2017 0

बाबरी मस्जिद के मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश की भाजपा के शीर्ष नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत 13 लोगों के खिलाफ मुकद्दमा चलेगा, के न केवल न्यायिक परिणाम निकलेंगे बल्कि इसके गंभीर राजनीतिक नतीजे भी निकलने तय है। एक बार फिर यह मुद्दा देश की राजनीति को भड़काने की क्षमता रखता है। सुप्रीम कोर्ट ने इन नेताओं पर लगे आपराधिक साजिश के आरोपों को बहाल करने की सीबीआई की याचिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया है। दिलचस्प है कि मामला 25 वर्ष पुराना है। सीबीआई यूपीए के शासन में खामोश रही पर अब अचानक उसने गढ़े मुद्दे उखाड़ने का फैसला कर लिया है। ऐसा इस वक्त क्यों किया गया, यह खुद […]

वह हमारा सज्जन नहीं (He Not Our ‘Sajjan’)

April 19, 2017 0

कैनेडा के रक्षामंत्री हरजीत सिंह सज्जन ने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह के इस आरोप का जवाब नहीं दिया कि वह खालिस्तानी समर्थक हैं। कैनेडा की सरकार ने अवश्य अमरेंद्र सिंह के बयान को ‘निराशाजनक’ कहा है जबकि सज्जन का कहना है कि उनका सारा ध्यान भारत तथा कैनेडा के रिश्तों को मज़बूत करने पर ही लगेगा। लेकिन उल्लेखनीय है कि वहां खालिस्तान समर्थकों पर रोक लगाने का कैनेडा की सरकार ने कभी प्रयास नहीं किया। लेकिन उनकी यात्रा विवाद में तो आ गई है क्योंकि अमरेंद्र सिंह ने सज्जन की पंजाब यात्रा के दौरान उनसे मिलने से इंकार कर दिया है। पंजाब में आमतौर से यह परम्परा रही है कि जो पंजाबी मूल के बड़े लोग अमेरिका या कैनेडा […]

मुसलमान उदारता दिखाएं (Muslims Should Show Generosity)

April 12, 2017 0

सुप्रीम कोर्ट ने यह सुझाव दिया है कि राम जन्मभूमि विवाद का हल अदालत से बाहर आपसी सहमति से निकाला जाए और जरूरत पड़ने पर खुद मुख्य न्यायाधीश मध्यस्थता के लिए तैयार हैं। इससे यह आशा जगी है कि शताब्दियों से लटके, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जे.एस. खेहर की बैंच के मुताबिक ‘धर्म और आस्था से जुड़े मामले’, को अब सुलझाया जा सकता है। देशभर में सबसे बड़ी अदालत के सुझाव का स्वागत किया गया है लेकिन दुख की बात है कि कई पक्षकार सहमत नहीं हैं। हिन्दू महासभा के वकील का कहना है कि समझौते का सवाल ही नहीं, जमीन रामलला विराजमान की है। दूसरी तरफ बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी का कहना है कि उन्हें अदालत […]

उड़ने के लिए और भी तो आसमान हैं (There Are Other Skies Also)

April 5, 2017 0

रिटायर होने के अपने फैसले पर सचिन तेंदुलकर ने लिखा है कि पहली बार उन्होंने अक्तूबर 2013 में इसके बारे सोचा था। वह बताते हैं, ‘‘मेरी सुबह जिम में वर्कआउट से शुरू होती थी। ऐसा में पिछले 24 साल से करता आ रहा था लेकिन उस अक्तूबर की सुबह कुछ बदल गया था…मुझे एहसास हुआ कि सुबह उठने के लिए मुझे खुद पर जबरदस्ती करनी पड़ रही है…अनिच्छा थी, पर क्यों? मेरा दिमाग और मेरा शरीर मुझे बता रहा था कि बस कर।’’ सचिन तेंदुलकर 39 वर्ष के थे जब वह रिटायर हुए। मुझे 50 वर्ष हो गए काम करते। मेरा सचिन के साथ मुकाबला तो नहीं पर क्या मेरे रिटायर होने का वक्त आ गया? मैंने 1967 में चेकोस्लोवाकिया […]

और भी गम हैं ज़माने में! (There Are Other Worries In The World)

March 29, 2017 0

उत्तर प्रदेश में भाजपा की भारी जीत पर कथित सैक्युलरवादी बहुत तड़प रहे हैं। विशेषतौर पर पांच बार सांसद योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद तो विलाप हदों को पार कर रहा है। प्रभाव यह दिया जा रहा है कि जैसे गणतंत्र के अंत की शुरुआत हो रही है। वह योगी को कारगुजारी दिखाने का मौका भी नहीं देना चाहते। उनके लिए काफी है कि योगी ने भगवा पहना हुआ है इसलिए पहले से ही फैसला कर लिया है कि योगी के मुख्यमंत्री बनने से अनर्थ हो जाएगा। आखिर वह बाबा गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश को कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं? ऐसे लोगों को समर्थन देते हुए राजमोहन गांधी ने एक लेख लिखा है कि उनके जैसे कई लोगों […]

और पंजाब बच गया! ( And Punjab Was Saved! )

March 22, 2017 1

पंजाब के चुनाव परिणाम के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े एक व्हट्सअप चैट पर मनोज सिंह का यह संदेश था, ‘‘जिन्हें लोग ‘भक्त’ कहते हैं उन्होंने एक बार फिर प्रमाणित किया कि वह सिर्फ देशभक्त हैं! और वह देश के लिए कुछ भी कर सकते हैं। वोटिंग के समय विचारधारा को छोड़ सकते हैं, पार्टी को छोड़ सकते हैं।’’ इसका अर्थ क्या है? साधारण भाषा में इसका अर्थ यह है कि पंजाब में संघ ने डूबती और अप्रासंगिक भाजपा को अपने हाल पर छोड़ कर प्रदेश को आप के अराजक शासन से बचाने के लिए कांग्रेस को वोट दिलवा दिए। पंजाब में कांग्रेस की जीत जहां अमरेन्द्र सिंह के अनुभवी नेतृत्व पर मोहर थी वहीं यह शहरी वोटर, […]

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